** या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थित । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमःया देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभुतेषु बुद्धि रूपेण थिथिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु तृष्णा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु क्षुधा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु निद्रा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु सृष्टि रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु भक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमःया देवी सर्वभूतेषू क्षान्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

मातंगी फोटो गेलेरी

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मातंगी मंदिर झाबुआ फोटो गेलेरी

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विडियो गेलेरी






चार धाम यात्रा

चार धाम यात्रा- matangi-darshan-jhabua-chaar-dhaam-yatra

 मातंगी ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष झाबुआ से यात्रा का आयोजन किया जाता है। जिसमें यात्रा में भाग लेने वाले भक्तो को चार धाम की यात्रा के साथ मॉ मातंगी  धाम की यात्रा भी कराई जाती है इस हेतु भक्तो से अतिन्युनतम शुल्क पर व उच्च गुणवत्ता युक्त सुविधाए प्रदान करते हुए उन्हे यात्रा का लाभ दिया जाता है। यह यात्रा प्रतिवर्ष नियोजीत परसमय पर ले जाई जाती है जिसके लिए यात्रा में शामिल होने वाले भक्तो की सुची बनाकर उस आधार पर आगामी कार्यक्रम नियोजित किएजाते है। 
            यह यात्रा 4 से 5 दिन की होती है परंतु तीर्थ स्थलो की संख्या एवं दुरी के हिसाब से समयावधि घट या बढ सकती है। यात्रा हेतु पुर्ण कार्यक्रम पुर्व नियोजीत होता है। यात्रा में बस मार्ग ,रेल मार्ग आदि का प्रयोग किया जाता है। धार्मिक स्थानो की दुरी अधिक होने के कारण संपुर्ण यात्रा बस मार्ग द्वारा ही करना संभव नही हो सकता है अतः इस हेतु विभिन्न वाहनो के द्वारा स्थलो तक पहुचना पडता है। स्थल तक पहुचने के बाद भक्तो को सभी सुविधाए जैसेः- भोजन ,ठहरना आदि सुविधाए निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है इस हेतु भक्तो से कोई अन्य राशि नही ली जाती है। 
      यात्रा में बुर्जुग भक्त भी होने के कारण यात्रा हेतु सबसे सुविधाजनक विकल्पो का इस्तेमाल किया जाता है जिससे की भक्तो को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पडे। इस यात्रा में जाने हेतु भक्तो से केवल उनके दैनिक उपयोग की वस्तुओ को ही साथ लाने का आग्रह किया जाता है शेष संपुर्ण सुविधाए ट्रस्ट द्वारा ही उपलब्ध कराई जाती है। यात्रा में शामिल होने के लिए नियत समयावधि के अंदर ट्रस्ट से संपर्क कर यात्रा का लाभ किया जा सकता हैं ।

यात्रा फॉर्म डाउनलोड करे नीचे डाउनलोड लिंक पर क्लिक करे ।

फॉर्म को पूर्णतः भरकर हमे ईमेल करे ,
या ट्रस्ट के पते पर डाक द्वारा भेजे।

आगामी योजना

🚩 माँ मातंगी ट्रस्ट: आगामी संकल्प एवं नव-निर्माण योजनाएं
  • 1

    परिसर सौन्दर्यीकरण

    माँ मातंगी मंदिर निर्माण के पश्चात संपूर्ण परिसर का उत्कृष्ट कलाकृतियों और नक्काशीदार पत्थरों से भव्य सौन्दर्यीकरण करना।

  • 2

    सर्व ब्राह्मण समाज धर्मशाला

    बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और समाजजनों हेतु सर्व-सुविधायुक्त, आधुनिक एवं वातानुकूलित विशाल धर्मशाला का निर्माण करना।

  • 3

    अतिथिगृह एवं सर्वसुलभ भोजनालय

    परिसर में सुसज्जित अतिथिगृह तथा अत्यंत कम सहयोग राशि पर शुद्ध, सात्विक भोजन उपलब्ध कराने हेतु 'मातंगी अन्नपूर्णा भोजनालय' का प्रस्ताव।

  • 4

    भव्य मांगलिक कम्युनिटी हॉल

    विवाह परिचय सम्मेलन, यज्ञोपवीत संस्कार, शतचंडी महायज्ञ और सामूहिक आयोजनों में उमड़ने वाली भीड़ हेतु एक विशाल पक्के शेड/हॉल का निर्माण।

  • 5

    पहुंच मार्ग सुदृढ़ीकरण व प्रकाश व्यवस्था

    वर्तमान पथरीले व दुर्गम मार्ग की समस्या को दूर करने हेतु डामरीकरण/CC रोड का निर्माण तथा रात्रि गमन को सुरक्षित बनाने हेतु सोलर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था।

  • 6

    रोजगार व युवा मार्गदर्शन केंद्र

    समाज के शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को स्वावलंबी बनाने हेतु रोजगार सेल की स्थापना, करियर काउंसलिंग और तकनीकी कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था।

  • 7

    सुनियोजित आयोजन रूपरेखा

    विवाह, सामूहिक यज्ञ व बड़े त्योहारों को सुचारू, विवाद-रहित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने हेतु प्री-प्लानिंग (पूर्व-नियोजन) डेस्क की स्थापना।

  • 8

    नक्षत्र वाटिका एवं दिव्य बगीचा

    भक्तों के मानसिक सुकून और ध्यान हेतु मंदिर के पास औषधीय पौधों, सुगंधित फूलों और नक्षत्र वाटिका से युक्त एक सुंदर उपवन तैयार करना।

  • 9

    संस्कारशाला एवं डिजिटल हेल्पडेस्क

    आगामी समय में नई पीढ़ी को वेदों, सनातन संस्कृति और संगीत से जोड़ने हेतु 'मातंगी संस्कारशाला' तथा ऑनलाइन दर्शन व बुकिंग हेतु डिजिटल पोर्टल का संचालन।

🤝 इन सभी पुनीत कार्यों को निष्ठापूर्वक धरातल पर आकार देकर एक सुशिक्षित, समृद्ध और सुसभ्य समाज का निर्माण करना ही ट्रस्ट का परम लक्ष्य है।

दान करे

माता मोढ़ेश्वरी मंदिर – दान एवं सहयोग पृष्ठ

“आपका सहयोग माता की भक्ति और समाज की सेवा में स्थायी योगदान बन सकता है।”
🌸 पवित्र उद्देश्य

सम्माननीय स्वजातीय बंधुओं,

झाबुआ नगर में माता मोढ़ेश्वरी की असीम कृपा से माता मोढ़ेश्वरी मंदिर का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और समाजिक चेतना का प्रतीक बन गया है। मंदिर का पूरा निर्माण केवल श्रद्धालुओं के सहयोग और समाज के समर्पित सदस्यों की मेहनत से संभव हुआ। अब यह पवित्र स्थल भविष्य की पीढ़ियों के लिए भक्ति, सेवा और सामाजिक चेतना का केंद्र बन चुका है।

विगत वर्षों में समाज ने अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. निःशुल्क यज्ञोपवित संस्कार
  2. विधवा विवाह समारोह
  3. वैकुण्ठधाम रथ यात्रा
  4. माता का पाटोत्सव
  5. निराश्रित पेंशन वितरण
  6. प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन

इन आयोजनों ने समाज में एकता, सहयोग और भक्ति की भावना को मजबूत किया है।

🏛 मातंगी परमार्थ ट्रस्ट – उद्देश्य और सामाजिक भूमिका

“मातंगी परमार्थ ट्रस्ट” झाबुआ का उद्देश्य केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है। अब जब मंदिर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, हमारा ध्यान समाज की निरंतर प्रगति, नवचेतना और सेवा कार्यों पर केंद्रित है।

मातंगी मंदिर डोनेशन
  • समाज की युवा पीढ़ी को शिक्षित, संस्कारित और सेवाभावी बनाना।
  • बेरोजगार युवाओं के लिए पाठशालाएँ और लघु उद्योग प्रशिक्षण।
  • विवाह योग्य वर-वधु के लिए मातंगी मैट्रीमोनी पोर्टल।
  • समाज के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को अकादमिक और सामाजिक प्रोत्साहन।
  • समाज में सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन, ताकि नई पीढ़ी को संस्कृति और परंपरा से जोड़ें।

ट्रस्ट का यह प्रयास समाज को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से सशक्त बनाने में सहायक है।

💡 सहयोग का महत्व

मंदिर अब बन चुका है, लेकिन समाज में नए विकास और सेवा कार्य के लिए सहयोग की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है। आपका योगदान:

  • मंदिर के आसपास के सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए स्थायी संसाधन उपलब्ध कराता. है।
  • समाज के शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधी योजनाओं के विस्तार में मदद करता है।
  • आने वाली पीढ़ियों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनाए रखता है।
  • आपकी भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक बनता है, जो समाज में सकारात्मक प्रभाव डालता है।
📌 सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

दान केवल धार्मिक कार्य नहीं है। यह समाज में एकता, समर्पण और सेवा का संदेश देता है। मातंगी परमार्थ ट्रस्ट के प्रयासों से अब तक समाज में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं:

  • युवा पीढ़ी में शिक्षा और संस्कार बढ़े।
  • बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार सृजन हुआ।
  • विधवा विवाह, नि:शुल्क संस्कार और अन्य सामाजिक कार्यक्रम संचालित हुए।
  • समाज में नवचेतना और सामाजिक चेतना का प्रसार हुआ।
आपका योगदान इन प्रयासों का हिस्सा बनता है और इसे भविष्य में और व्यापक स्तर पर विस्तारित किया जा सकेगा।

माता मोढ़ेश्वरी मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन अब यह समाज के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। मातंगी परमार्थ ट्रस्ट इस पवित्र कार्य में आपकी सहभागिता और सहयोग की अपेक्षा करता है। आपका योगदान इस पवित्र कार्य में अमूल्य है। आइए, हम सभी मिलकर झाबुआ नगर और समाज के लिए सशक्त, शिक्षित और धर्मपरायण समुदाय का निर्माण करें।

माता मोढ़ेश्वरी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।

🙏 मातंगी माता की असीम कृपा से निर्मित इस भव्य धाम में, आपका हर योगदान एक दिव्य आशीर्वाद बनकर समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचेगा।

मातंगी ट्रस्ट सदैव इस उद्देश्य से कार्यरत रहा है कि धार्मिक स्थल केवल पूजा का स्थान न होकर, समाज के उत्थान और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का केंद्र भी बने। मंदिर प्रांगण में विशाल पांडाल, नक्षत्र वाटिका, बालाजी-हनुमान मंदिर, स्फटिक शिवलिंग के साथ शिवमंदिर, तालाब और धर्मशाला जैसी सुविधाएँ इसी संकल्प का प्रमाण हैं।

इन व्यवस्थाओं के संचालन और आने वाले समय में अतिथिगृह, भोजनालय, भव्य सभागार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए आधुनिक ढाँचों के निर्माण हेतु आपके सहयोग की आवश्यकता है।

आपका दान सीधे ट्रस्ट के बैंक खाते में सुरक्षित रूप से जमा होगा। इस पेज पर आपको केवल वही तीन ज़रूरी जानकारी मिलेगी, जिनसे दान की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बन सके: हमारा प्रयास है कि हर श्रद्धालु बिना किसी बाधा के इस दिव्य कार्य का हिस्सा बन सके। आपका हर अंशदान न केवल मंदिर की सेवा में लगेगा, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार, संस्कृतियों और परंपराओं के संरक्षण में भी उपयोग किया जाएगा।

🙏 आपका सहयोग ही इस धाम की आत्मा है। माँ मातंगी आपके जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण करें।

ACCOUNT NUMBER IFSC CODE BRANCH NAME
30684703636 SBIN0000396 SBI, Jhabua

सुविधाए

मातंगी धाम – धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र

मातंगी मंदिर, झाबुआ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता का विशाल केंद्र बन चुका है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि वे प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक आयोजनों का भी अनुभव करते हैं।

🛕 वर्तमान संरचना और विशेष आकर्षण
1. विशाल पांडाल

मंदिर प्रांगण में एक विशाल पांडाल बना है, जहाँ नियमित रूप से विविध धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। यह पांडाल भक्तों को एक साथ जोड़ने और सामूहिक भक्ति का अनुभव कराने का प्रमुख स्थल है।

2. नक्षत्र वाटिका

मंदिर प्रांगण का एक विशेष आकर्षण है नक्षत्र वाटिका, जिसमें सभी नौ ग्रहों के अनुरूप वृक्ष लगाए गए हैं। ज्योतिष और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार लगाए गए हजारों पौधे और वृक्ष यहाँ का वातावरण न केवल पवित्र बल्कि प्राकृतिक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाते हैं।

3. विशाल तालाब

प्रांगण से सटा हुआ विशाल तालाब मंदिर की शोभा को और बढ़ाता है। यह तालाब भक्तों और आगंतुकों के लिए शांति और सुकून का स्थान है।

4. শ্রী बालाजी हनुमान मंदिर

मंदिर परिसर में ही श्री बालाजी हनुमान मंदिर की स्थापना की गई है। यहाँ प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन होता है। साथ ही हनुमान जयंती पर तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम संपन्न होते हैं, जिनमें हजारों भक्त उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।

5. विशाल शिव मंदिर

प्रांगण में ही स्फटिक शिवलिंग की स्थापना कर एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण किया गया है। यह मंदिर भक्तों को दिव्य शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है।

🏨 भक्तों के लिए उपलब्ध सुविधाएँ
  1. आवास व्यवस्था: दर्शनार्थियों और समाज के लोगों के ठहरने हेतु उपयुक्त स्थान।
  2. भोजन सुविधा: धार्मिक कार्यक्रमों और दैनिक आगंतुकों के लिए भोजनालय और भंडारे की परंपरा।
  3. धर्मशाला: बड़े सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए विशाल धर्मशाला की व्यवस्था।
  4. समारोह स्थल: समाज में होने वाले विवाह, संस्कार और बड़े आयोजनों के लिए उपयुक्त स्थान।
🌿 आगामी विकास योजनाएँ

मंदिर को और अधिक सुव्यवस्थित एवं सुविधायुक्त बनाने के लिए ट्रस्ट द्वारा कई योजनाएँ बनाई गई हैं:

  • सर्व-सुविधायुक्त अतिथिगृह और भोजनालय – ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को उचित ठहरने और भोजन की सुविधा मिल सके।
  • सुंदर बगीचा – संध्या समय भक्त हरियाली युक्त वातावरण में विश्राम और ध्यान कर सकें।
  • भव्य हॉल का निर्माण – विवाह परिचय सम्मेलन, यज्ञोपवित संस्कार, षटचंडी यज्ञ, हवन और अन्य बड़े समारोहों को बिना किसी विघ्न के संपन्न कराने के लिए।
  • सड़क और प्रकाश व्यवस्था – मंदिर सड़क से लगभग 200 मीटर की दूरी पर है और रास्ता पथरीला होने से भक्तों को कठिनाई होती है। ट्रस्ट और नगरपालिका द्वारा इस मार्ग का डामरीकरण और उचित प्रकाश व्यवस्था शीघ्र कराई जाएगी।
🚧 मार्ग और प्रकाश व्यवस्था
  1. 1. मंदिर तक आने-जाने वाले मार्ग को विकसित करना प्राथमिकता में है।
  2. 2. डामरीकरण का कार्य जल्द शुरू होगा ताकि पैदल और वाहन से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिले।
  3. 3. रात्रि में सुरक्षित आवाजाही के लिए आधुनिक लाइटिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
  4. 4. यह कार्य नगरपालिका और ट्रस्ट की देखरेख में समय पर पूरा किया जाएगा।

✨ मातंगी धाम – भविष्य की दृष्टि

मातंगी धाम आज पूरे समाज के लिए गर्व और आस्था का प्रतीक बन चुका है। यहाँ की नक्षत्र वाटिका, विशाल पांडाल, बालाजी हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, तालाब और धर्मशाला श्रद्धालुओं को एक संपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव कराते हैं। ट्रस्ट का यह संकल्प है कि आने वाले वर्षों में इसे और विकसित कर झाबुआ नगर का प्रमुख तीर्थ स्थल बनाया जाए। हम सभी भक्तों और समाज के सहयोग से मातंगी धाम को न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाएँगे।

आरती ,स्तुति एवं चालीसा

मंदिर विषयक

माँ मातंगी धाम: झाबुआ

प्रकृति, शक्ति और आस्था का पावन संगम

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माँ मातंगी धाम, मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में स्थित एक परम पावन और अलौकिक धार्मिक स्थल है। यह धाम आदिशक्ति की दस महाविद्याओं में से एक, देवी मातंगी को समर्पित है, जिन्हें सनातन धर्म में वाणी, प्रखर ज्ञान, संगीत, बुद्धि और संपूर्ण ललित कलाओं की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

यह सुरम्य धाम न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि अद्भुत प्राकृतिक शांति का भी वासस्थल है। चारों ओर से घने और हरे-भरे वृक्षों से आच्छादित यह परिसर ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात् प्रकृति की गोद में मुस्कुरा रहा हो। मंदिर प्रांगण में कदम रखते ही भक्तों को एक अतींद्रिय शांति और प्राचीन तपोभूमि जैसी दिव्यता का अनुभव स्वतः होने लगता है।

इतिहास एवं पावन पटोत्सव

माँ मातंगी धाम एक नवनिर्मित स्थापत्य कला का उत्कृष्ट और भव्य उदाहरण है। इस पावन मंदिर की नींव और माँ मातंगी की दिव्य विग्रह (प्रतिमा) की प्राण-प्रतिष्ठा **फरवरी 2011** में संपन्न हुई थी। यह आयोजन एक भव्य चार दिवसीय महामहोत्सव के रूप में आयोजित किया गया था, जिसमें वेदोक्त मंत्रोच्चार के साथ माँ का प्रथम पटोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया गया था। तब से लेकर आज तक प्रतिवर्ष फरवरी माह में यहाँ वार्षिक पटोत्सव एवं विशेष महाआरती का आयोजन बड़ी भव्यता के साथ संपन्न होता है।

महाविद्या: कुलदेवी के रूप में मान्यता

देवी मातंगी तांत्रिक उपासनाओं और दस महाविद्याओं की प्रमुख शक्ति हैं, जिन्हें साक्षात् देवी पार्वती का ही एक स्वरूप माना जाता है। इसके साथ ही, माँ मातंगी **मोढ़ ब्राह्मण समुदाय की परम आराध्य कुलदेवी** हैं। माँ की आराधना करने से वाणी में मधुरता, संगीत और कला के क्षेत्र में सिद्धि तथा अज्ञान के अंधकार से मुक्ति प्राप्त होती है, यही कारण है कि कला और शिक्षा जगत से जुड़े लोग यहाँ विशेष रूप से शीश नवाने आते हैं।

सह-अस्तित्व: सिद्धपीठ बालाजी धाम

इस धाम की पवित्रता को यहाँ का प्रांगण और अधिक बढ़ा देता है, जिसे **सिद्धपीठ बालाजी धाम** कहा जाता है। वर्ष 1993 में जनसहयोग के पावन संकल्प से हनुमान जी के एक प्राचीन छोटे चबूतरे के स्थान पर सुंदर मंदिर का निर्माण हुआ था।

🔱 सिद्धत्व का रहस्य: इस परिसर में पिछले कई वर्षों से अनवरत रूप से प्रतिदिन रामायण पाठ तथा प्रत्येक शनिवार को सामूहिक सुंदरकांड का संगीतमय पाठ किया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी स्थान पर लगातार 12 वर्षों तक नित्य पूजन और पाठ होने से वह भूमि जाग्रत और सिद्ध हो जाती है। इसी कारण यह क्षेत्र 'सिद्धपीठ' के रूप में विश्वविख्यात है।

प्रमुख उत्सव एवं आयोजन

धाम परिसर में वर्षभर धार्मिक अनुष्ठान चलते रहते हैं, जिनमें से मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं:

नवरात्रि उत्सव

नौ दिनों तक विशेष घटस्थापना पूजन, अखंड ज्योति कलश और शतचंडी महायज्ञ।

छप्पन भोग

विशेष पर्वों पर माँ मातंगी और बालाजी सरकार को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग।

हनुमान जन्मोत्सव

मारुति यज्ञ, महाभिषेक, भव्य सिंदूरी श्रृंगार और विशाल भंडारा आयोजन।

वार्षिक पाटोत्सव

फरवरी माह में स्थापना दिवस पर तीन दिवसीय विशेष अनुष्ठान व महाप्रसादी।

स्थान एवं सुगम मार्ग निर्देश (Connectivity)

यह पावन धाम भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत सुलभ मार्ग पर स्थित है, जिससे देश के किसी भी कोने से श्रद्धालु यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं:

📍 मुख्य अवस्थिति: झाबुआ शहर के मध्य भाग में, इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-47) पर।

🚗 प्रमुख शहरों से दूरी: यह स्थल व्यावसायिक राजधानी इंदौर से लगभग 150 किलोमीटर और गुजरात के दाहोद शहर से मात्र 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

🚂 रेलवे मार्ग: रेल यात्रियों के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मेघनगर (MGN) है, जो यहाँ से केवल 15 किलोमीटर दूर है।

🚌 स्थानीय साधन: मेघनगर स्टेशन या झाबुआ बस स्टैंड पर उतरने के बाद, भक्तगण बिना किसी परेशानी के नियमित बसों, टैक्सियों, जीप या ऑटो के माध्यम से सीधे माँ मातंगी धाम पहुँच सकते हैं।

आसपास के प्रमुख कस्बे: धाम के समीप ही रानापुर, थांदला, जोबट और मेघनगर जैसे कई प्रमुख कस्बे व ग्राम स्थित हैं, जहाँ से नित्य सैकड़ों स्थानीय श्रद्धालु दर्शन लाभ हेतु धाम परिसर में आते हैं।

बालाजी धाम

|| सिद्धपीठ बालाजी धाम ||

कृषि विज्ञान केंद्र (कृषि फार्म) परिसर, झाबुआ

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पावन इतिहास व सिद्धत्व

मां मातंगी मंदिर प्रांगण के समीप ही यह अलौकिक सिद्धपीठ बालाजी धाम स्थित है। इतिहास के अनुसार, पूर्व में यहाँ घने जंगलों के बीच पहाड़ी पर हनुमान जी का एक छोटा सा चबूतरा हुआ करता था। कृषि विभाग के धर्मपरायण कर्मचारियों ने यहाँ नित्य पूजन की शुरुआत की थी।

वर्ष 1993 में जनसहयोग के पावन संकल्प से यहाँ एक भव्य और सुंदर मंदिर आकार ले सका और प्रभु की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। शास्त्रों के अनुसार, जिस स्थान पर निरंतर 12 वर्षों तक बिना रुके नित्य पूजा-पाठ होता है, वह क्षेत्र सिद्ध हो जाता है। इसी कारण अनवरत रामायण व सुंदरकांड पाठ के प्रताप से इसे 'सिद्धपीठ' की संज्ञा मिली।

कृषि फार्म परिसर की विशेषताएँ

यह मंदिर झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) फार्म की पहाड़ी पर स्थित होने के कारण अत्यंत अनूठा है। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

प्राकृतिक वातावरण

चारों ओर कृषि फार्म की हरियाली, शांत और प्रदूषण मुक्त आध्यात्मिक वातावरण।

पहाड़ी सौंदर्य

ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ से प्रकृति का बेहद मनोरम दृश्य दिखाई देता है।

कृषि-भक्ति संगम

कृषि वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और कृषकों की अटूट श्रद्धा का केंद्र।

पवित्र परिसर

मातंगी माता मंदिर और बालाजी धाम का एक ही प्रांगण में होना इसकी दिव्यता बढ़ाता है।

श्री हनुमान जन्मोत्सव (जयंती) धूम

सिद्धपीठ बालाजी धाम पर प्रतिवर्ष श्री हनुमान जन्मोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और भव्य पैमाने पर मनाया जाता है, जिसमें संपूर्ण झाबुआ अंचल से हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु उमड़ते हैं:

🚩 महाभिषेक व श्रृंगार: जन्मोत्सव के पावन अवसर पर तड़के प्रभु बालाजी का सिंदूर, अष्टगंध और दिव्य चोलों से अलौकिक श्रृंगार किया जाता है।
अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति के साथ ही विशाल मारुति यज्ञ (हवन) का आयोजन होता है।
शाम को महाआरती के पश्चात समस्त भक्तों के लिए विशाल भंडारे (महाप्रसादी) का आयोजन कृषि फार्म प्रांगण में किया जाता है, जो देर रात तक चलता है।

सेवा एवं सूत्रधार

पूर्व सेवादार: कृषि विभाग के निष्ठावान कर्मचारी श्री शिवनारायण पुरोहित ने पिछले 16 से अधिक वर्षों तक अकेले इस मंदिर की देखरेख और पूजन व्यवस्था का जिम्मा पूरी निष्ठा से संभाला।

वर्तमान सेवादार: श्री पुरोहित जी की सेवानिवृत्ति के पश्चात अब सर्वसम्मति से यह पावन उत्तरदायित्व श्री राकेश त्रिवेदी को सौंपा गया है, जो पूरी श्रद्धा और तत्परता से मंदिर की व्यवस्थाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

परशुराम फोटो गेलेरी

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मोढेश्वरी स्तुत्यष्टक

देवी मोढ द्विजो तणी भगवती मातंगी जे मातृतारक्षा मोढ समस्तनी करी रही श्री मोढ मातंगिकासिंहारूढ थई अढार भुजथी चका युधो धारती,सीताराम थकी समर्चित महा मोढेश्वरी शोभती...
धर्मा रण पुराण पुण्य स्थलमां श्री राम अध्यक्षमा,सीताराम समेत यज्ञ करता मोढेश्वरी साक्षीमां,उदगाता सह्ययाजुषो मली करो मोढर्षिओ प्रार्थना,तेथी तुं परितुष्ट मोढ पर छे, नित्य अभ्यर्थना...
गोत्रोनो समवाय स्थापी जगमां विप्रो थकी पूजता,पट मोढा द्विगिभागी वैश्यदलमां तु नित्य छे वंदिता,तारे पूर्ण कृपा थकी प्रसरी छे मोढो तणी वल्लिका,पूजाने करी वंदना तुज पदे, अर्पे तेने मालिक...
धर्मोद्वारक रामचंद्र करतां तारे पूजा प्रेमथीयज्ञ स्तंभ सभा सुमंडप रच्या मोढेश्वरी नामथी,स्नानार्थे पृथु सूर्यकुंड रचना श्री विश्वकर्मा तणी,छे अदभूत निश्वलेष्ट कृतिए श्री मोढ देवी तणी...
देवीना गणमां गणेश्वरी थई, वापी तटे तुं वसे,वापी कूप तणा दयार्द जल तुं अंतरथी पाता हसे,भक्तोने द्विजवर्य मोढ सघलां तारी कृपामां वसे,छाया छयी अखंड तारी जगमां तुं देवी सौमां वसे...
देवीने द्विज मोढ ज्यां परवरी छोडी गया पुरी,देवी सागर तुल्य वावजलमां डूबेल ते कालथी,ज्यांथी ब्राह्मण-पुण्य कर्म फलदा देवी पूजा लोप छे.त्यांथी मोढ विरकत संग तजती जे मोढनो प्राण छे...
मोढोत्पिति अने विकास करवा श्री रामनी लालसा,मोढेरा युंरी “मूलराज” हठथी मोढे करी खालसा,तोये वृक्ष समग्र मोढ कुलनुं, पट मोढ शाखा थतां,मोढेरा कुलदेवीने नमनथी सौ मोढ पुंजी जता...
मातंगीनो विनथी स्तुति पाठ कीधो,वंदी शिरे, हृदयथी बहु ल्हाव लीधो,माता दयाली तुं द्वार बधां समान,मोढेश्वरी तव पदे करूं हुं प्रणाम...
पुष्पांजली भगवती पर थाती ज्यारे,स्तोत्रो भणी हृदयथी धरूं ध्यान त्यारे,पूजा प्रदोष समये विधिथी करूं ज्यां,मोढेश्वरी कुशल थै करूणा करे त्यां...
स्तोत्र शुद्ध हृदये भणशे प्रदोषे,तेना खरे त्रिविध ताप समाई जाशे,मोढेश्वरी द्विजवरा हृदयेष्ट देवी,लक्ष्मीरूपी जननी तुं परमेष्ट देवी...१०

श्री मातंगी मोढेश्वरी चालीसा



वंदु विनायक विध्नहर, शारद करो सहाय,
आनंदनी याचना मोढेश्वरी गुण गवाय.प्रणमुं पाय मातंगी मात,मोढेश्वरी नाम तुज ख्याता (१)
मातंगी वास वाव मही कीधो,आश्रय सर्व मोढोने दीधो, (२)
सोल शृंगार सिंहारूढ शोभे,भुज अढार दर्शन मन लोभे (३)
वंदन चरणामृत सुखदाई,आतमना पड शत्रु हणाये (४)
भरतखंड
शुभ पश्र्विम भागे,धरमारण्य क्षेत्र तप काजे, (५)
साधक रक्षक भट्टारीका कहावे,तपस्वी तप तपवा अही आवे (६)
देव देवी जपतप अहीं जापे,मा भट्टारीका तप रक्षण आपे (७)
तीरथ सरस्वती सुखदाई,पितृ शांति अहीं पींडथी थाये. (८)
मोक्ष धाम देहुती माता,आश्रम कपिल शास्त्र विख्याता (९)
मोढेरा शुभ स्थान प्रतापी,मोढेश्वरी चतुर युग व्यापी (१०)
सूर्य मंदिर बकुंलार्क अजोडा,विश्वकर्माकृत रविकुंड चौडा (११)
धरमारण्य धरा अति पावन,श्री रामयज्ञे मातंगी सुहावन (१२)
महासुद तेरस सुखदाता,प्रगट्यां मातंगीयज्ञे माता (१३)
जयजयकार जगत मही थाये,सुमन वरसे देवो जय गाये (१४)
सूर्यकुंड सुभग फलदाता,झीले जल मातंगी माता (१५)
श्री रामसीता यज्ञ आराधे,सत्यपुरे मातंगी साधे (१६)
लक्ष्मीरूप मातंगी माता,पूजन नैवेद सर्व सुखदाता (१७)
वडा, लाडु, दुधपाक सुहावे,नैवेद धरे सीता प्रिय भावे (१८)
समस्त मोढ तणी कुलमाता,अष्ठसिध्धि नवनिधि फलदाता (१९)
महासुद तेरस थाल धराये,मोढ चडती दिन प्रतिदिन थाये (२०)
अष्टादश भुज आशिष आपे,स्थान नीज सत्यपुरे स्थापे (२१)
सतयुगे सतपुरी कहावे,त्रेतानाम महेरकपुर भावे (२२)
द्वापर युग मोहकपुर सोहे,मोढेरा कलयुग मन माहे (२३)
धर्मराज शिव तप आराधे,सहस्त्र यर्षे शिव दर्शन साधे (२४)
प्रगट्यां शिव शुभ आशिष आपे,स्थान नीज धर्मेश्वर स्थापे (२५)
वदे महेश्वर कृपा निधाना,विशावनाथ काशी समस्थाना (२६)
मात रांदल अश्वनी रूप लीधा,ध्वादश वर्ष कठीन तपकीधां (२७)
सूर्यराणी रांदल सुखदायी,उपनामे संज्ञा कहेवाये (२८)
तप प्रभाव संज्ञा सुखदाई,पति सूर्यदेवमुख दर्शन थाये (२९)
संज्ञाए ज्यां तप आराध्या,सूर्य मंदिर रामे त्यां बांध्या (३०)
प्रति सुद तेरस व्रततप थाये,मले मान्युं यम भीती जाये (३१)
पूजे कन्या मन कोड पुराये,तपथी विधवाना दु:जाये (३२)
सेवे सधवा सर्व सुख थाये,त्र्हेम, मद अने कुसंप जाये (३३)
नम: मातंगी नाम मुख आवे,भूत पिशाच भय अति दूर जावे (३४)
मोढेश्वरी तव पूजन प्रभावे,सत्य दया तप सौच दिल आवे (३५)
कष्ट भंजन मातंगी माता,बने सर्व ग्रहो सुखदाता (३६)
विद्यार्थी मातंगी जप जापे,वधे विद्या, बुद्धि धन आपे (३७)
मातंगी यात्रा अति सुख आपेकर्म बंधन भवभवना कापे (३८)
दलपतराम मात गुण गाये,उपनाम आनंद कहेवाये (३९)
संवत वीस सुडतालीस मांहे,मातंगी चालीसा आनंद गाये (४०)
दोहा:
श्री मोढेश्वरी चालीसा, भावे रोज भणायवधे विद्या, धन, सुसंतति, पदारथ चार पमाय
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