या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थित । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्tस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमःया देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभुतेषु बुद्धि रूपेण थिथिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु तृष्णा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु क्षुधा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु तुष्टि-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु निद्रा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी rूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु सृष्टि रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभूतेषु भक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमःया देवी सर्वभूतेषू क्षान्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
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मोढेश्वरी स्तुत्यष्टक

🔱 श्री मोढेश्वरी मातंगी स्तुति 🔱

देवी मोढ द्विजो तणी भगवती मातंगी जे मातृता
रक्षा मोढ समस्तनी करी रही श्री मोढ मातंगिका
सिंहारूढ थई अढार भुजथी चका युधो धारती,
सीताराम थकी समर्पित महा मोढेश्वरी शोभती...

धर्मा रण पुराण पुण्य स्थलमां श्री राम अध्यक्षmaा,
सीताराम समेत यज्ञ करता मोढेश्वरी साक्षीमां,
उदगाता सह्ययाजुषो मली करो मोढर्षिओ प्रार्थना,
तेथी तुं परितुष्ट मोढ पर छे, ए नित्य अभ्यर्थना...

गोत्रोनो समवाय स्थापी जगमां विप्रो थकी पूजता,
पट मोढा द्विगिभागी वैश्यदलमां तु नित्य छे वंदिता,
तारे पूर्ण कृपा थकी प्रसरी छे मोढो तणी वल्लिका,
पूजाने करी वंदना तुज पदे, अर्पे तेने मालिक...

धर्मोद्वारक रामचंद्र करतां तारे पूजा प्रेमथी
यज्ञ स्तंभ सभा सुमंडप रच्या मोढेश्वरी नामथी,
स्नानार्थे पृथु सूर्यकुंड रचना श्री विश्वकर्मा तणी,
ए छे अदभूत निश्वलेष्ट कृतिए श्री मोढ देवी तणी...

देवीना गणमां गणेश्वरी थई, वापी तटे तुं वसे,
वापी कूप तणा दयार्द जल तुं अंतरथी पाता हसे,
भक्तोने द्विजवर्य मोढ सघलां तारी कृपामां वसे,
छाया छयी अखंड तारी जगमां तुं देवी सौमां वसे...

देवीने द्विज मोढ ज्यां परवरी छोडी गया आ पुरी,
देवी सागर तुल्य वावजलमां डूबेल ते कालथी,
ज्यांथी ब्राह्मण-पुण्य कर्म फलदा देवी पूजा लोप छे.
त्यांथी मोढ विरकत संग तजती जे मोढनो प्राण छे...

मोढोत्पिति अने विकास करवा श्री रामनी लालसा,
मोढेरा युंरी “मूलराज” हठथी मोढे करी खालसा,
तोये वृक्ष समग्र मोढ कुलनुं, पट मोढ शाखा थतां,
मोढेरा कुलदेवीने नमनथी सौ मोढ पुंजी जता...

मातंगीनो विनथी स्तुति पाठ कीधो,
वंदी शिरे, हृदयथी बहु ल्हाव लीधो,
माता दयाली तुं ज द्वार बधां समान,
मोढेश्वरी तव पदे करूं हुं प्रणाम...

पुष्पांजली भगवती पर थाती ज्यारे,
स्तोत्रो भणी हृदयथी धरूं ध्यान त्यारे,
पूजा प्रदोष समये विधिथी करूं ज्यां,
मोढेश्वरी कुशल थै करूणा करे त्यां...

आ स्तोत्र शुद्ध हृदये भणशे प्रदोषे,
तेना खरे त्रिविध ताप समाई जाशे,
मोढेश्वरी द्विजवरा हृदयेष्ट देवी,
लक्ष्मीरूपी जननी तुं परमेष्ट देवी... १०
 

आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों की दिव्य झलकियाँ