दिव्य नक्षत्र वाटिका
आध्यात्मिक और वानस्पतिक वैभव का जीवंत लोक
झाबुआ के पावन सिद्धपीठ बालाजी धाम परिसर में 22 हजार वर्ग फीट के विशाल भूभाग पर 4 मई 2017 को अलौकिक 'दिव्य नक्षत्र वाटिका' की स्थापना की गई थी। पूर्णतः आध्यात्मिक पद्धति से निर्मित यह देश की दूसरी सबसे बड़ी व विशिष्ट वाटिका मानी जाती है। यहाँ ब्रह्मांडीय ऊर्जा को संतुलित करने वाले ऐसे दुर्लभ पौधे सहेजे गए हैं, जो सीधे तौर पर विभिन्न ग्रहों व नक्षत्रों के पूजन अनुष्ठानों में उपयोग किए जाते हैं।
वर्तमान में इस अनुपम वाटिका को वैश्विक स्तर का सौंदर्य प्रदान करने के लिए सीधे **आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध नर्सरियों** से विशेष आकर्षक फूल और दुर्लभ पौधों की प्रजातियाँ मंगवाई जा रही हैं। यहाँ **27 नक्षत्र और 9 ग्रहों** का प्रतिनिधित्व करने वाले विशिष्ट रोपण के साथ-साथ चारों ओर दिव्य हरियाली का अनूठा ताना-बाना बुना गया है।
इस अलौकिक वाटिका में दो भिन्न देशों के गौरवशाली **राष्ट्रीय वृक्षों** का एक साथ मिलन देखने को मिलता है—जिसमें भारत का सनातन पूजनीय **वट वृक्ष** और श्रीलंका का राजसी **नाग केसर** शामिल हैं। इसके अलावा देश के सुदूर क्षेत्रों जैसे शिलांग से लाई गई विशेष 'बेत' नामक औषधि, जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों के चीड़, और झालावाड़, आगर, इंदौर, दिल्ली व खरगोन से लाई गई अनूठी पुष्पीय प्रजातियाँ यहाँ की हवाओं को सुवासित कर रही हैं।
🌸 भगवान तिरुपति का परम प्रिय 'सोन चम्पा'
समिति के मुख्य सूत्रधार विशाल त्रिवेदी व पंडित हिमांशु शुक्ल के अनुसार, दक्षिण भारत के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में भगवान वेंकटेश बालाजी को जिस विशेष सोन चम्पा की सुगंधित माला अर्पित की जाती है, उस दिव्य वृक्ष को यहाँ विशेष यत्न से रोपा गया है, जो अब पूर्ण परिपक्व होकर महक रहा है।
वर्तमान में वाटिका की भव्यता को चार चांद लगाने के लिए पाँच अलग-अलग दुर्लभ प्रजातियों के गुलाब (हैदराबादी, झालावाड़ के विशेष गुलाब, चमेली और मोगरा) विकसित किए गए हैं। विद्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माने जाने वाले लेवेंडर, गूगल, देशी कपूर, सफेद शमी, और रजनीगंधा के कारण पूरी वाटिका में चौबीसों घंटे एक दिव्य आध्यात्मिक खुशबू छाई रहती है।
🌿 औषधि व नवग्रह वृक्ष
- रक्त चंदन व रूद्राक्ष
- सफेद खैर व शमी
- देशी कपूर व सिंदूर
- गूगल, कुचला व चीड़
- पीपल, साल व बकुल
- कदम्ब, अरीठा व सुपारी
🌸 दिव्य पुष्प प्रजातियाँ
- राजसी सोनचम्पा
- अखंड गज मोगरा
- रातरानी व जूही
- वसंत मालती व कुंद
- एगजोरा व नट
- 5 प्रकार के शाही गुलाब
💡 विशेषता: यहाँ स्थित 'गज मोगरा' की यह विलक्षण विशेषता है कि यह किसी खास मौसम में नहीं बल्कि पूरे वर्ष (12 महीने) अपनी कलियों से लदकर खिलता रहता है। इस संपूर्ण वाटिका की निस्वार्थ सेवा व रख-रखाव **50 समर्पित सदस्यों की समिति** द्वारा नित्य किया जाता है।
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक व वानस्पतिक विरासत को पुनर्जीवित करना तथा झाबुआ अंचल में एक ऐसा आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र विकसित करना है, जो सनातन संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को एक सूत्र में पिरो सके।



